हिन्दू धर्म अन्य धर्मों को देता है, ज्ञान या शिक्षा!!
प्राचीन काल से ही वही धर्म अधिक टिका है जिसमें समयानुसार परिवर्तन होता रहा है| कई धर्म जसे गन्धर्व, देत्य और राक्षस आदि, वर्तमान में पौराणिक गाथा या इतिहास का नाम ही बन कर रह गये हैं|
पौराणिक काल के बाद बहुत धर्म पनपे परन्तु ईसाई और इस्लाम धर्म के उदय के बाद हजारों धर्म लुप्त हो गए। एसा अधिकांशत: कट्टरपंथी देशों के धर्मो के साथ हुआ उनमें से बहुत से धर्मों का तो आज अस्तित्व मिट गया है| और आज कुछ जो बचे हैं उनका अस्तित्व भी संकट में है। एक अनुमानित आंकड़ों के अनुसार अब तक दुनियाभर में धर्मों की संख्या लगभग 300 से ज्यादा हो सकती है|
वर्तमान में 7 धर्मों हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई, इस्लाम और यहूदी, को ही स्थापित धर्म माना जा सकता है| अफ्रीका
में वुडू धर्म के लोगों की संख्या भी बहुत अधिक है, परन्तु वे भी तेजी से ईसाई या
इस्लाम में परिवर्तित हो रहे है|
कुछ धर्म आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है, उनमें पारसी, यजीदी, जेन, शिंतो, लाओत्सु, ताओ, सिचो-नो-ले, तेनरिक्यो, काओ दाई, चेनोडो मत, जुचे, कन्फ्यूशीवाद
जैसों के नाम रखे जा सकते है|
लुप्त हुए धर्म The lost Religions. (देखें फूट नोट)[1].:-
आदि काल से अब तक सेकड़ों धर्म पूरी तरह मिट गए है उनमें से कई की कोई जानकारी भी
नहीं है|
धर्म क्या है?
आधुनिक विद्वानों ने दर्शन के अंतर्गत प्रमाण शास्त्र (epistomology) न्याय
वैशेषिक, तत्व दर्शन (Ontology) सांख्य , व्यवहार शास्त्र (Ethics) रामायण महाभारत
आदि, मनोविज्ञान (Psychology) योग उपनिषद आदि, और सोंदर्य शास्त्र (Esthetics)
वेदांत आदि, ये पांच विभाग किये हैं|
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, प्राचीन काल से ही दर्शन शास्त्र के इन चार
भागों में हिन्दू धर्म में विभक्त किया गया है|
"Know the truth"!! इन चारों में एक बात सामान्य है, एक ध्येय है - “सत्य को जानो”
सत्य ही मुक्ति का मार्ग है, सत्य में ही अति सुख है|
अर्थात् सत्य का ज्ञान ही धर्म है!
परन्तु सत्य एक “नियत” या निश्चित तथ्य नहीं है| दिखाई देने वाला आज का
सत्य, आने वाले कल का झूठ हो सकता है या व्यतीत कल का झूठ आज का सत्य हो सकता
है|
योरोपियन देशों में पहिले पती को छोड़ कर दुसरे से विवाह पाप नहीं, हमारे
यहाँ है|
हिदुओं में चाचा भुआ संतानों का आपस में विवाह पाप है, वहीँ मुस्लिमों में
यह धर्म है|
धर्म शास्त्र अनुसार पिता की आज्ञा मानना धर्म है, पर प्रहलाद पिता की आज्ञा न मान कर ही महान कहलाया|
श्रीकृष्ण गुरु संदीपनी की सेवा ‘भक्ति’ करके प्रतिष्ठित हुए, वहीँ उसी काल में अर्जुन अपने गुरु आचार्य द्रोणाचार्य का वध कर प्रतिष्टित हुए| श्रवण कुमार माता की सेवा कर प्रसिद्ध हुए, दूसरी और परशुराम माता का वध करके भी भगवान और महान कहाए|
‘दान देना’ धर्म है, तो दूसरी और ब्राह्मणों का ‘दान लेना’ धर्म है|
नर हत्या पाप है, पर युद्ध आदि में हत्या पुण्य सिद्ध कर दी गई है|
आत्म हत्या पाप है, पर जौहर, अग्नि प्रवेश आदि को उचित कह दिया गया है|
झूठ बोलना पाप है, पर अनेक अवसरों पर जैसे युधिष्टर का झूठ, गाय को हत्या
से बचने अदि के लिए बोला झूठ, पाप नहीं कहाया|
इस प्रकार के अनेकानेक उदाहरण हमरे धर्म ग्रंथों में भरे पड़े हैं|
धर्म अधर्म का निर्णय करते समय बड़े- बड़े विद्वान् भी “किं कर्म किमकर्मेति कवयोsप्यत्र
मोहिताः” क्या करें, क्या न करें में उलझ गए है|
आदि काल से अब तक प्रत्येक धर्म व्यवस्था पर अनेक विद्वानों ने इस सत्य को
लेकर अपने विचार प्रस्तुत किये और हर युग में तत्कालीन व्यवस्था के अनुसार समाज ने
उस सत्य को स्वीकार भी किया, हर काल का सत्य स्वयं में सत्य रहा, वर्तमान में भी
यही सत्य है|
इसका अर्थ तो यही है, की जो धर्म वर्तमान के मान से सत्य स्वीकारता नहीं वह
अंत की और बढता जाता है|
बहु पत्नी प्रथा, अधिक संतान और पुत्र प्राप्ति किसी समय न्याय या आवश्यक
सत्य थीं, आज अभिशाप और असत्य है| बाल विवाह, सती प्रथा, आदि को धर्म कह महिमा
मंडित करना जो कल पुण्य और धर्म था, आज पाप है|
आज हिदू, मुस्लिम या किसी भी धर्म में पूर्व धर्म अनुसार अधिक पत्नी
पाने या अधिक सन्तान पाने को ईश्वर या ऊपरवाले
की मेहरवानी कहें तो यह अधर्म और पाप होगा| यही बात स्त्रियों की शिक्षा, पर्दा,
बुरका प्रथा, आदि भी आज अधर्म होगा|
हिन्दू धर्म ग्रंथो में समय समय पर संशोधन होते रहे है| बाल्मीकी के राम जहाँ
‘अमिष-आहारी’ थे, तो तुलसी के राम ‘पूर्ण शाकाहारी’ प्रतिपादित हुए और इस परिवर्तन
को हिन्दू जनमानस ने पूर्ण समर्पण से स्वीकार किया, यही नहीं पूर्व के राम को भुला
दिया|
आज भी हिन्दू धर्म के वर्तमान प्रवचनकार और उपदेशक पौराणिक गाथाओं में भी
भी वर्तमान आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन कर नवीन समाज व्यवस्था के अनुसार अपनी
प्रस्तुती देते रहते है, यह किसी से भी छुपा नहीं है|
नवीन धर्म साहित्य में संशोधन, परिवर्धन, और रचनायें, समय समय पर आदि
शंकराचार्य, ऋषि दयानंद, विवेकानंद, से लेकर आचार्य श्री राम शर्मा जी आदि आदि
जैसे अनेकों विद्वान् करते रहे हैं, और भविष्य में भी करते रहेंगे, और भारतीय हिदू
जनमानस उन्हें स्वीकारता रहेगा, इसीलिए हिन्दू धर्म विश्व का सबसे प्राचीन और
स्थापित धर्म बन गया है |
वर्तमान कुछ धर्म कट्टरता छोड़ें:-
वर्तमान का कोई भी धर्म वास्तव में खराब या छोटा नहीं कहा जा सकता, वे भी
समय मान से श्रेष्ट रहे तभी उनके बहुसंख्यक अनुयाई हुए| निश्चय ही शासन, शक्ति आदि
कई कारणों के अनुसार तत्कालीन लाभ के लिए तत्कालीन जन मानस ने उन्हें स्वीकार किया
गया होगा| परन्तु क्यों उनके वर्तमान धर्म प्रचारक हिन्दू धर्म की इस अनंत काल के
जीवन के महत्त्व को समझ, प्राचीन परम्परा और नियमो, उसूलों, आदि आदि में वर्तमान
समय के मान से अनुपयुक्त, समाज के लिए हानिकर विचार, तथ्य, आयतें, उसूल, और
परम्परागत सामजिक स्तिथि को परिवर्तन कर अपने समाज को एक श्रेष्ठ समाज में बदलने
का साहस करते|
यदि वर्तमान सभी धर्म अपनी प्राचीन परंपरागत कट्टरता को छोड़ कर अपने धर्म
में परिवर्तन, परिवर्धन और संशोधन करते है, तो यह मानवता की सेवा होगी और इतिहास
उन्हें भी देवदूत, पैगम्बर, आदि नाम से जानेगा|
अस्तु –
15-03-2021 17:55:42
डॉ मधु सूदन व्यास.
एम् आई जी 4./1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र इंडिया
[1] - The lost Religions. लुप्त हुए धर्म:-
आज वैश्विक स्तर पर पूरी तरह से लुप्त हुए धर्मो में पैगन (Paganism), कैनेनिट (Canaanite), एटिनिज़्म
(ateism), मिनोयन (Minoan), चर्वाक (charvaka), मिथरा (Mithraism), मैनिकेस्म
या Mani (Manichaeism), तेंग (Tengriism), असुर
(Ashurism), ऑल्मेक (Olmec), मुशरिक (mushrik), सबाईन, ग्नोस्तिसिस्म, याज्दानिस्म, अहल ई हक्क, सिचो-नो-ले, तेनरिक्यो, काओ दाई, यूनानी
धर्म, सुमेरियाई
धर्म, बेबिलोनिया
धर्म, असीरियाई
या अश्शूर धर्म, इजिप्ट का
धर्म, रोम का
धर्म, माया धर्म, ग्नोस्तिसिस्म, याज्दानिस्म
अहल ई हक्क, आदि उल्लेखनीय हैं |
